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आँवले के उपयोग

तत्व
मात्रा

प्रोटीन
0.5 %

वसा
0.1 %

रेशा
3.4 %

खनिज द्रव्य
0.7 %

कार्बोहाइड्रेट
14.1 %

पानी
81.2 %

विटामिन-“C”
लगभग आधा ग्राम

कैल्शियम
0.05 %

फास्फोरस
0.02 %

लौह
लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग/100 ग्रा

परिचय :
         आंवले का पेड़ भारत के प्राय: सभी प्रांतों में पैदा होता है। तुलसी की तरह आंवले का पेड़ भी धार्मिक दृष्टिकोण से पवित्र माना जाता है। स्त्रियां इसकी पूजा भी करती हैं। आंवले के पेड़ की ऊचांई लगभग 6 से 8 तक मीटर तक होती है। आंवले के पत्ते इमली के पत्तों की तरह लगभग आधा इंच लंबे होते हैं। इसके पुष्प हरे-पीले रंग के बहुत छोटे गुच्छों में लगते हैं तथा फल गोलाकार लगभग 2.5 से 5 सेमी व्यास के हरे, पीले रंग के होते हैं। पके फलों का रंग लालिमायुक्त होता है। खरबूजे की भांति फल पर 6 रेखाएं 6 खंडों का प्रतीक होती हैं। फल की गुठली में 6 कोष होते हैं, छोटे आंवलों में गूदा कम, रेशेदार और गुठली बड़ी होती है, औषधीय प्रयोग के लिए छोटे आंवले ही अधिक उपयुक्त होते हैं।

विभिन्न भाषाओं में नाम :
संस्कृत                   आमलकी, धात्री, शिवा।
हिंदी.                  आंवला, आमला, आंवरा।
मराठी                    आंवली, आंवलकांटी, आंवला।
गुजराती                 आंवला, आमला।
बंगाली                    आमलकी, आमला, आंगला।
तेलगू                     असरिकाय, उशीरिकई।
द्राविड़ी                    नेल्लिक्काय्, अमृत फल,   वयस्था।
कन्नड़                    निल्लकाय, नेल्लि।
अरबी                     आमलन्
अंग्रेजी      एमब्लिक माइरोबेलन, इंडियन गोसबेरी।

लैटिन           एमब्लिका ऑफिसिनेलिस।

स्वरूप :

पेड़ : आंवले का पेड़ 6 से 8 मीटर ऊंचा होता है तथा इसका तना टेढ़ा-मेढ़ा और 150 से 300 सेमी तक मोटा होता है। फरवरी-मई में इस पेड़ पर फूल लगने शुरू होते हैं तथा अक्टूबर से अप्रैल तक फल मिलते हैं।
छाल : आंवले के पेड़ की छाल पतली और परत छोड़ती हुई होती है।
फूल : आंवले के फूल पीले रंग के और गुच्छों में लगे होते हैं।
फल : आंवले का फल गोलाकार आधे से एक इंच व्यास के गू�

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